अर्थसंग्रह की अर्थवत्ता
Author(s) -
शिव प्रसाद शुक्ल
Publication year - 2021
Publication title -
haridra
Language(s) - Hindi
Resource type - Journals
ISSN - 2582-9092
DOI - 10.54903/haridra.v2i06.7729
Subject(s) - computer science
प्रस्तावना वेद वेदांगों का अध्ययन व्यवस्थित ढ़ंग से समाप्त कर लेने वाला ही धर्म का जिज्ञासु इस ग्रंथ को आधिकारिक ढ़ंग से पढ़ सकता है। अर्थसंग्रह का प्रतिपाद्य विषय भी धम्र ही है। कहीं-कहीं अधर्म के निदर्शन भी होते हैं किन्तु निरसन करने के लिए ही उसका प्रतिपादन किया गया है। अतः जिज्ञासु का ध्यान गौण रूपेण उधर जाता है। धर्म और ग्रंथ (अर्थसंग्रह) में बोध्य बोधक भाव अथवा प्रतिपाद्य-प्रतिपादक भाव सम्बन्ध है। धर्मानुष्ठान से सामान्यतया स्वर्गादिक फल ही इसका प्रयोजन है।
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