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वैदिक कालीन आयुध निर्माण तकनीकी
Author(s) -
Manoj Kumar Rao,
Ipshit Pratap Singh
Publication year - 2015
Publication title -
dev sanskriti : interdisciplinary international journal (online)/dev sanskriti : interdisciplinary international journal
Language(s) - Hindi
Resource type - Journals
eISSN - 2582-4589
pISSN - 2279-0578
DOI - 10.36018/dsiij.v6i0.65
Subject(s) - computer science
भारतीय संस्कृति एक हाथ में शस्त्र तथा दूसरे हाथ में शास्त्र का संदेश देती है। वैदिक काल मे तत्कालिन ऋषि मुनियों ने दुष्टों के दमन हेतु आयुध निर्माण पद्धति को विकसित किया था। मध्यकाल और आधुनिक काल में भारत में रही विदेशी ताकतों ने आयुध निर्माण के क्षेत्र में परनिर्भरता के अवगुण को विकसित किया। भारतीय संस्कृति में सदैव ‘बहुजन हिताय एवं बहुजन सुखाय’ का सिद्धान्त विद्यमान रहा है किन्तु इसके साथ ही साथ प्रत्येक काल में इस सिद्धान्त के विपरीत स्वभाव वाले लोग भी पाये गये हैं जो पर पीड़ा एवं पर अधिकार में सुख का अनुभव करते हैं। ऐसे लोगों से आत्मरक्षा एवं लोकरक्षा हेतु आयुधों की आवश्यकता पड़ती है। वैदिक ग्रंथों में अनेकों आयुधों का उल्लेख मिलता है जिनका प्रयोग वैदिक देवताओं एवं आर्य योद्धाओं द्वारा सदैव लोक कल्याण में किया गया। उन आयुधों की निर्माण तकनीकी साधारण थी किन्तु उनकी शक्ति असीमित थी, क्योंकि उन आयुधों का संचालन मंत्र शक्ति पर आधृत था जिन्हें वैदिक ऋषियों एवं देवताओं ने अपनी तप शक्ति से लोक हित को ध्यान में रखकर निर्मित किया था। प्रस्तुत शोधपत्र में वैदिक कालीन उन्हीं आयुधों के प्रकार एवं निर्माण तकनीकी के विषय में उल्लेख किया गया है। प्रस्तुत शोध पत्र भारत के स्वर्णिम अतीत की शानदार उपलब्धियों को याद कर आयुध निर्माण के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को प्रेरित करने का प्रयास है। निःसंदेह आज हमारे पास संसाधनों का अभाव नहीं है बस आवश्यकता सृजनात्मक आत्मनिर्भरता को प्राप्त करने की है।

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