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साहित्यिक कृति: एक भाषिक अभिव्यक्ति
Author(s) -
करूणा निधि
Publication year - 2013
Publication title -
dev sanskriti interdisciplinary international journal
Language(s) - Hindi
Resource type - Journals
eISSN - 2582-4589
pISSN - 2279-0578
DOI - 10.36018/dsiij.v2i0.16
Subject(s) - business
प्रस्तुत आलेख में साहित्य और भाषा की अभिन्नता को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से प्रकट करने का प्रयास किया गया है। इसमें साहित्य को लेकर भाषावैज्ञानिक और भाषा को लेकर साहित्यकारों की विश्लेषणात्मक दृष्टि की सामंजस्यता पर विचार किया गया है, जो आज दो विरोधी धाराओं से बिल्कुल अलग है। इसका कारण इन दोनों के मध्य एक वैज्ञानिक विश्लेषणात्मक प्रणाली की उपलब्धता कही जा सकती है, जो प्राचीन होते हुए भी आज की साहित्यिक आलोचना पद्धति के लिए सर्वथा नवीन उपकरण है, जिसे ‘शैलीविज्ञान’ के नाम से जाना जाता है। इसलिए यहाँ विश्लेषणात्मक प्रविधि को अपनाते हुए भाषा, साहित्य और शैली तीनों के अभिन्नात्मक स्वरूप को बतलाया गया है। आज भाषा का प्रौद्योगिकी के साथ संबंध होने के कारण प्राकृतिक भाषा संसाधन के रूप में भाषा संबंधी शोध, अध्ययन और विश्लेषण के नए आयाम लिए हुए हैं, जिसमें एक क्षेत्र शैलीविज्ञान का भी है। इसके सिद्धांतों और उपकरणों का प्रयोग कर इस क्षेत्र में कंप्यूटर ग्राह्य आदि अनेक नियमों को निरूपित कर शैली-अभिज्ञानकों और शैली-विश्लेषकों का निर्माण किया जा सकता है, जो पाठ विश्लेषण की प्रक्रिया में उपयोगी साबित हो सकते हैं, जो अपनी प्राचीनता में भी नवीनता को समाहित किए हुए है।

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