z-logo
open-access-imgOpen Access
भारतीय परिपेक्ष्य में प्राकृतिक खेती की चुनौतियां एवम भविष्य
Author(s) -
वेद प्रकाश,
प्रकाश चन्द घासल,
पवन जीत,
प्रेम कुमार सुंदरम
Publication year - 2022
Publication title -
कृषि मञ्जूषा
Language(s) - Hindi
Resource type - Journals
ISSN - 2582-144X
DOI - 10.21921/km.v4i02.9288
Subject(s) - computer science
सामान्य उपभोक्ताओं में, खाद्य गुणवत्ता और सुरक्षा दो महत्वपूर्ण कारक हैं जिन पर लगातार ध्यान दिया जा रहा है। सामान्य उपभोक्ताओं में परंपरागत रूप से उगाए गए खाद्य पदार्थों के कारण स्वास्थ्य पर अत्यधिक प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। परंपरागत रूप से उगाए गए खाद्य पदार्थों में उच्च कीटनाशक अवशेष, अधिक नाइट्रेट, भारी धातु, हार्मोन एवं एंटीबायोटिक की उपस्थिति के कारण स्वास्थ्य पर अत्यधिक प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। प्राकृतिक खेती को फसल उत्पादन प्रणाली के रूप में स्वीकार किया जाता है जो परंपरा, नवाचार और उन्नत कृषि प्रौद्योगिकी के संयोजन से मिट्टी, पारिस्थितिकी तंत्र और लोगों के स्वास्थ्य को बनाए रख सकती है। आम तौर पर किसानों द्वारा अपनाए जाने वाले प्रमुख घटकों में अनुपचारित बीज, जैव खाद और जैव उर्वरक, जैव कीटनाशक, खादध्वर्मीकम्पोस्ट और फसल विविधीकरण शामिल हैं। जैविक रूप से उगाए गए खाद्य पदार्थों की लोकप्रियता उनके पोषण और स्वास्थ्य लाभ के कारण दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है। प्राकृतिक खेती से पर्यावरण की भी रक्षा होती है और एक राष्ट्र पर अधिक सामाजिक-आर्थिक प्रभाव पड़ता है।

The content you want is available to Zendy users.

Already have an account? Click here to sign in.
Having issues? You can contact us here
Accelerating Research

Address

John Eccles House
Robert Robinson Avenue,
Oxford Science Park, Oxford
OX4 4GP, United Kingdom